परिवार नियोजन के साधनों पर 5 दिवसीय प्रशिक्षण शुरु

 🔼परिवार नियोजन की विधियों पर शहरी एएनएम्  का पांच दिवसीय प्रशिक्षण ।

🔼क्षेत्रीय कार्यक्रम प्रबंधन इकाई द्वारा दिया जा रहा प्रशिक्षण।

🔼परिवार कल्याण के बारे में जागरूक करने में  एएनएम की  रहती है प्रमुख भूमिका

सहरसा ।  राष्ट्रीय शहरी स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत जिले के नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र (यूपीएससी) द्वारा शहरी क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढाने की दिशा में काम चल रहा है। इसके तहत सहरसा जिले के शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र  की एएनएम को परिवार नियोजन के साधनों पर सदर अस्पताल के क्षेत्रीय प्रशिक्षण केन्द्र में 5 दिवसीय प्रशिक्षण दिया जा रहा है। रविवार को क्षेत्रीय अपर निदेशक, स्वास्थ्य सेवाएँ डॉं अवधेश कुमार की अध्यक्षता में राष्ट्रीय शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया था | प्रशिक्षण का उद्देश्य शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की एएनएम को परिवार नियोजन के साधन को लेकर इस्तेमाल किए जाने वाले उपकरण पर जानकारी विकसित कर उनका क्षमतावर्धन करना है| इस प्रशिक्षण का आयोजन 26 सितम्बर से किया जा रहा है जो 30 सितंबर तक चलेगा। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में शहरी क्षेत्र के यू पी एस सी 1 एवम् 2 से 10 ए एन एम् का चयन कर प्रशिक्षित किया जा रहा है। क्षेत्रीय अपर निदेशक, स्वास्थ्य सेवाएं डॉं अवधेश कुमार का कहना है कि लोगों को लगातार जागरूक करने का प्रयास रहता है कि 'छोटा परिवार-सुखी परिवार' के नारे को अपने जीवन में उतारने में ही सभी की भलाई है। इसके लिए उनके सामने 'बास्केट ऑफ च्वाइस' मौजूद हैं, उनके फायदे के बारे में भी प्रशिक्षकों द्वारा सभी प्रतिभागियों को अच्छी तरह से अवगत  कराया जा रहा है। 


🔼गर्भ निरोधक के साधनों एवम् इसके उपकरणों के इस्तेमाल की विस्तृत जानकारी देना है लक्ष्य--

प्रशिक्षण देने का कार्य सदर अस्पताल के चिकित्सा पदाधिकारी डॉ विभा रानी एवम् डॉ नेहा द्वारा किया जा रहा है। प्रशिक्षकों के द्वारा प्रतिभागियों को परिवार नियोजन के तहत इंट्रा यूटेराइन गर्भनिरोधक उपकरण (आई यू सी डी), पोस्ट पार्टम इंट्रायूटेराइन कॉन्ट्रासेप्टिव डिवाइस (पीपी आईयूसीडी) आदि की विशेष जानकारी प्रदान की जा रही है। चिकित्सा पदाधिकारी डॉ.विभा रानी का कहना है कि लाभार्थियों को परिवार कल्याण के बारे में जागरूक करने में एएनएम की प्रमुख भूमिका रहती है। परिवार नियोजन के लिए अपनाई जाने वाली विधि पीपी आई यू सी डी आदि की जानकारी डॉ.विभा रानी द्वारा सभी ए एन एम को दी गई। डॉ नेहा बताती हैं कि परिवार नियोजन स्वास्थ्य विभाग की प्राथमिकताओं में शामिल है, जिसके लिए समय-समय पर तमाम योजनाओं और कार्यक्रमों को लाभार्थियों तक पहुंचाने की हर संभव कोशिश रहती है। इसमें भी दो बच्चों के बीच अंतर रखने के लिए कई तरह के अस्थायी गर्भ निरोधक साधन लाभार्थियों की पसंद के मुताबिक उपलब्ध हैं। इसमें एक प्रमुख साधन है पोस्ट पार्टम इंट्रायूटेराइन कॉन्ट्रासेप्टिव डिवाइस (पीपी आईयूसीडी) जो कि प्रसव के 48 घंटे के अंदर लगता है और जब दूसरे बच्चे का विचार बने तो महिलाएं इसको आसानी से निकलवा भी सकती हैं। इन सभी विषय पर प्रशिक्षण में प्रतिभागियों को विस्तृत रूप से बताया जा रहा है। 


🔼दो बच्चों के जन्म के बीच कम से कम तीन साल का अंतर अवश्य रखना चाहिए-- 

प्रमंडलीय आशा समन्वयक सह क्षेत्रीय कार्यक्रम प्रबंधन अविनाश कुमार ने कहा कि मातृ एवं शिशु के बेहतर स्वास्थ्य के लिहाज से दो बच्चों के जन्म के बीच कम से कम तीन साल का अंतर अवश्य रखना चाहिए। उससे पहले दूसरे गर्भ को धारण करने योग्य महिला का शरीर नहीं बन पाता और पहले बच्चे के उचित पोषण और स्वास्थ्य के लिहाज से भी यह बहुत जरूरी होता है। प्रशिक्षण में बताया जा रहा है कि इसके लिए लोगों को जागरूक करने के साथ ही उन तक उचित गर्भ निरोधक सामग्री की पहुंच किस तरह से सुनिश्चित हो। 

राज्य स्वास्थ्य समिति के निर्देश पर क्षेत्रीय कार्यक्रम प्रबंधन इकाई द्वारा चयनित ए एन एम् का यह प्रशिक्षण रीजनल ट्रेनिंग सेंटर, सदर अस्पताल में किया जा रहा है जो 30 सितंबर तक चलेगा | प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रमंडलीय आशा समन्वयक सह क्षेत्रीय कार्यक्रम प्रबंधन अविनाश कुमार, क्षेत्रीय अनुश्रवण मूल्यांकन अधिकारी- सह- कार्यपालक सहायक अविनाश झा, शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ आर के  सिंह आर.पी.एम.यू. टीम के अन्य सदस्य उपस्थित रहे |

रिपोर्ट : डेस्क दैनिक आजतक।

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