अतिक्रमण की चपेट में आलमनगर-माली चौक मुख्य पथ, राहगीरों को हो रही परेशानी

🔴 जगह-जगह बने गड्ढों के कारण कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा।

🔴 खाड़ा हाई स्कूल के पास बना  जानलेवा गड्ढा।

🔴 सड़कों पर पशुपालकों द्वारा लगातार जारी है रखना गोबर और मक्के को सुखाने में उपयोग कर रहा सड़क कृषक।

रिपोर्ट : पुष्पम कुमार।

उदाकिशुनगंज (मधेपुरा)।

उदाकिशुनगंज अनुमंडल अन्तर्गत आलमनगर विधानसभा और सोनवर्षा विधानसभा को जोड़ने वाली आलमनगर-माली मुख्य पथ इन दिनों अपनी बदहाली और प्रशासनिक उदासीनता के कारण राहगीरों के लिए बेहद खतरे की घंटी देने ही नहीं सफर में  सजा देने लायक बन चुका है। जगह-जगह पिचिंग (काला रोड) उखड़ जाने और सड़क के धंसने के कारण यह मुख्य मार्ग हादसों को खुला आमंत्रण दे रहा है।

सड़क की स्थिति इतनी विकराल और  जर्जर जैसी हो चुकी है कि आए दिन मोटरसाइकिल और चार पहिया वाहन चालक अनियंत्रित होकर दुर्घटना का शिकार हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर समय रहते पदाधिकारी इसपर ध्यान नहीं देंगे तो कभी भी कोई बड़ी अनहोनी घटना घट सकती है।
सबसे भयावह स्थिति खाड़ा चौक से सटे दक्षिण,हाई स्कूल के समीप बने हुए गड्ढे तथा चौक के समीप विंध्यवासिनी स्थान के सामने रखे सड़क पर गोबर के कारण पसर रहा गंदगी और जाम का मुख्य कारण बनता जा रहा है।

🔴 अंचलाधिकारी ने पूर्व में हटवाया था सड़क से गोबर और कचरा :

बताते चलें कि कुछ माह पूर्व अंचलाधिकारी हरीनाथ राम ने सड़क से गोबर हटवाकर इसे अतिक्रमण मुक्त किया था। पुनः लगातार पशुपालकों द्वारा गोबर सड़क पर रखकर इसे अतिक्रमण की आगोश में ले रहा है। जहां-तहां सड़क पर इतने गहरे गड्ढे हो गए हैं कि वाहनों की गति सरकती हुई थम सी जाती है।
स्थानीय प्रबुद्ध नागरिक और राहगीरों ने चिंता जताते हुए कहा कि आगामी बरसात का मौसम दस्तक देने वाला है। अगर मॉनसून से पहले इन गड्ढों की मरम्मत नहीं कराई गई तो इनमें जलजमाव हो जाएगा और भी स्थिति भयावह रूप ले सकती है। शास्त्री स्मारक+2 विद्यालय के समीप जमा  पानी न जाने कितने राहगीरों और स्कूली बच्चों के लिए मुश्किलों का पहाड़ बन सकता है,इसका अंदाजा लगाना भी मुश्किल है।

🔴 सड़क पर पसरे हुए मक्का और बंधे हुए पशु हैं वाहन चालकों के लिए जानलेवा:

एक तरफ जहाँ गड्ढों ने राहगीरों की कमर तोड़ रखी है,वहीं दूसरी तरफ मानवीय लापरवाही और अतिक्रमण ने आग में घी का काम किया है। सुखासनी मुशहरी के समीप ही नहीं कमोबेश सभी जगह सड़क की हालात किसानों द्वारा खस्ता किया जा रहा है। किसान मुख्य सड़क पर मक्का सुखाने से बाज नहीं आ रहे हैं और पशुपालक अपने अपने पशुओं को बांधने से। आलम यह है कि करीब आधी सड़क पर मक्का फैलाकर पूरे मार्ग को अवरुद्ध कर दिया जाता है। इसके अलावा,सड़क के बचे हुए हिस्सों और किनारों पर गोबर का उपला थापने और कचरे का अंबार लगा देने से सड़क संकरी हो गई है। यही कारण है कि इस मार्ग पर चौबीसों घंटे जाम की स्थिति बनी रहती है।
जिस कारण आम राहगीरों को घंटों जाम में फंसकर अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है। चिलचिलाती धूप और धूल के गुबार के बीच इस सड़क को पार करना किसी युद्ध को जीतने जैसी विकट स्थिति जैसा अहसास कराता है।

🔴 जनता का सवाल,आखिर कब जागेगा किसान,पशुपालक और प्रशासन ?

सड़क की इस दुर्दशा,अतिक्रमण और रोजाना लगने वाले जाम को लेकर किसान, पशुपालकों और स्थानीय प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आखिर ऐसे संवेदनशील और जन-सरोकार से जुड़े मामले को प्रशासन गंभीरता से क्यों नहीं ले रही है? क्या प्रशासन किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रही है?

प्रत्येक दिन सड़क से आने-जाने वाले स्थानीय लोग,शिक्षक,सरकारी कर्मी, वाहन चालकों तथा यात्रियों ने जिला प्रशासन और संबंधित विभाग से मांग की है कि बरसात से पहले सड़क की मरम्मत कराई जाए और सड़क को अतिक्रमण मुक्त कराकर जाम की समस्या से निजात दिलाई जाए।

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