खाड़ा में कृषि जनकल्याण चौपाल का हुआ आयोजन,कृषकों को दी गई खेती की विभिन्न लाभप्रद जानकारी
🔴 कृषक यदि फसल अवशेष खेतों में जलाया तो फार्मर आईडी सस्पेंड होगा और प्राथमिकी भी हो सकती है दर्ज : मनीष (कृषि समन्वयक)।
रिपोर्ट: पुष्पम कुमार।
उदाकिशुनगंज (मधेपुरा)।
उदाकिशुनगंज प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत खाड़ा पंचायत के खाड़ा बाजार स्थित दूर्गा मंदिर में शनिवार को कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंध अभिकरण "आत्मा" मधेपुरा के तत्वावधान में "कृषि जनकल्याण चौपाल" का आयोजन किया गया।
खाड़ा पंचायत के दूर्गा मंदिर परिसर में आयोजित "कृषि जनकल्याण चौपाल" कार्यक्रम की अध्यक्षता वर्तमान मुखिया ध्रुव कुमार ठाकुर ने की।
खाड़ा में कृषि समन्वयक मनीष कुमार,सहायक तकनीकी प्रबंधक सिद्धार्थराज और कृषि सलाहकार अनिल कुमार पाठक ने चौपाल में कृषि से संबंधित मिट्टी जांच के आधार पर संतुलित मात्रा में रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग,फसल अवशेष प्रबंधन एवं जैविक खेती को बढ़ावा देने,रवि फसल में लगने वाले रोग एवं कीट-व्याधि प्रबंधन की जानकारी,किसान गोष्ठी में भाग लेने की जानकारी,कृषि विभाग द्वारा चलाए जा रहे राज्य सरकार तथा केन्द्र सरकार द्वारा चलाए जा रहे क़ृषि योजना आदि विषयों पर विस्तार से जानकारी दी गई।
🔴 चौपाल में कृषि से संबंधित जानकारी के लिए नीचे दिए गए वीडिओ को क्लिक करें :-
चौपाल में जहां मुखिया ध्रुव कुमार ठाकुर ने उपस्थित कृषकों को चौपाल से खेती के गुड़ और नई-नई जानकारियां लेकर इसे अमल करने को प्रोत्साहित किया। वहीं कृषि समन्वयक मनीष कुमार ने कृषकों को खेतों की बचाव में प्राकृतिक खेती और जैविक खेती की महत्ता सहित विभिन्न जानकारियां दी। उन्होंने कृषकों से साफ शब्दों में कहा यदि स्वस्थ रहना है तो प्राकृतिक खेती अपनाएं,और आर्गेनिक खेती (जैविक खेती) पर जोर दें। समन्वयक ने कहा कि कृषक खेतों में किसी भी फसल अवशेष को नहीं जलाएं। यह फसल उपज को प्रभावित ही नहीं करता खेती में सहयोगी कीट को भी मार देता है। ऐसा यदि किसी भी कृषक का शिकायत मिलता है तो उनका फार्मर आईडी चार साल के लिए सस्पेंड ही नहीं किया जाएगा बल्कि किसान योजना से संबंधित लाभ से वंचित रह जाएंगे और उनपर प्राथमिकी भी दर्ज हो सकती है।
सहायक तकनीकी प्रबंधक सिद्धार्थ राज ने मिट्टी की जांच और इसके मुताबिक फसल को लगाने पर कृषक को जोड़ दिया। उन्होंने सभी किसानों से आग्रह किया है कि कृषक अपनी-अपनी खेतों के मिट्टी की जांच उपरांत फसल यदि लगाते हैं तो बेहतर फसल उत्पादन में मददगार साबित होगा। उन्होंने कहा कि बीजामृत,जीवामृत,नीमास्त्र, ब्रह्मास्त्र और दसपर्णी अर्क बनाने हेतु प्रशिक्षण भी दिया। उन्होंने प्राकृतिक खेती में उपयोग किए जा रहे इनपुट में प्रयुक्त सामग्री,तैयारी, उपयोग और इनके फायदे के बारे में भी विस्तृत जानकारी दी। श्री सिद्धार्थ राज ने रस चूसने वाले कीड़े और छोटी झल्लियों के प्रबंधन के लिए नीमास्त्र बनाने की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि 5 किलो नीम की पत्तियां,5 लीटर गौमूत्र,1 किलो ग्राम गाय का गोबर और 100 लीटर पानी में कुचलकर इसे लकड़ी से हिलाएं। 48 घंटे बाद घोल को छानकर फसल पर स्प्रे करें जिससे कीट नहीं लगेगी।इधर प्रधानमंत्री द्वारा किसान सम्मान निधि की 23वीं किस्त के हस्तांतरण की लाइव प्रसारण भी उपस्थित कृषकों को मोबाइल पर दिखाया गया।
चौपाल में मुख्य रूप से कृषक राजेश रंजन उर्फ सोना सिंह,शिवेंद्र सिंह,गोपाल झा,ललित नारायण राम,चंदन कुमार झा,रमण कुमार सिंह,नीरज पासवान, मणिकांत झा,गोपाल चंद्र झा,राजीव झा,महंत झा,रामचंद्र शर्मा,डॉ प्रवेश कुमार मेहता,आकाशदीप,चन्द्रानन झा, विभाकर झा सहित दर्जनों लोग मौजूद थे।


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