बीपीएससी की परीक्षा में बनौली के विष्णुकांत ने मारी बाजी, बनेंंगे जिला शिक्षा पदाधिकारी,स्वजनों ने जाहिर की खुशी

⚫️ यदि छात्र ठान लें तो कोई परीक्षा कठिन नहीं,हासिल कर सकते हैं सफलता।

⚫️छात्रों को सफल होने के लिए दृढ़ संकल्पित होने के साथ-साथ कठिन परिश्रमी और पढ़ाई के प्रति ईमानदार  होना आवश्यक।

पटना।  कौन कहता है आसमां में सुराख नहीं हो सकता एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारों...। इस कहावत को चरितार्थ कर दिखाया है भोजपुर के विष्णुकांत ने।

बताते चलें कि कुछ दिन पहले बीपीएससी ने परीक्षाफल जारी किया है। बिहार लोक सेवा आयोग की इस 65वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा में भोजपुर जिला अन्तर्गत अगियांव प्रखंड के बनौली गांव का भारत मां का रखवाला रिटायर्ड आर्मी रामेश्वर राय का बेटा विष्णुकांत राय ने बाजी मारी है।

🔼विष्णुकांत ने 64वीं एवं 65वीं दोनों परीक्षा में मारी बाजी--

कुछ छात्र कहते हैं कि बच्चे को पढ़ाई के बाद जॉब नहीं मिल रहा है। बनौली गांव का छात्र विष्णुकांत की बात करें तो जॉब उसके पीछे घूमता नजर आ रहा है। जहाँ अधिकतर छात्र छोटे-छोटे प्रतियोगी परीक्षाओं में असफल होने का रोना रोते हैं, वहीं विष्णुकांत (जिसकी उम्र करीब 29 वर्ष) ने बीपीएससी की दो परीक्षाओं (64वीं एवं 65वीं) में सफलता प्राप्त कर ये साबित कर दिखाया कि मेधावी छात्र मेहनत से असंभव को संभव कर लेते हैं।

🔼पत्रकार ने ली विष्णुकांत की जीवनी से संबंधित विस्तृत जानकारी--

पत्रकार से साक्षात्कार में विष्णुकांत ने कहा कि दूसरी बार में 64वीं बीपीएससी परीक्षा में जहां एससी-एसटी ब्लॉक वेलफेयर आफिसर में वो सलेक्ट हुए वहीं तीसरी बार में 65वीं बीपीएससी परीक्षा में 72वीं रैंक लाकर जिला शिक्षा पदाधिकारी के पद पर चयनित हुए हैं। वो जिला शिक्षा पदाधिकारी पद पर अपना योगदान दे सकते है।

🔼माता -पिता--

उनके पिता रामेश्वर राय रिटायर्ड आर्मी (पर्सनल) हैं और माता अतिसुंदर देवी कुशल गृहणी हैं। 

🔼स्टडी पर एक नजर--

इनकी पढ़ाई पर नजर दी जाय तो प्राइमरी की पढाई ये गांव के ही सरकारी विद्यालय से एवं कक्षा 6 से 12 की पढ़ाई (सीबीएसई)  जेन पॉल्स, आरा से तथा इंजिनियरिंग की तैयारी कोटा जाकर किया था। 

उन्होंने कहा कि 2011-15 सत्र में मैं एनआइटी पटना से स्नातक किया। उसके बाद कुछ समय के लिए दिल्ली जाकर सिविल सर्विसेज की परीक्षा की भी तैयारी इन्होंने की थी। इनका "आप्सनल सब्जेक्ट" भूगोल रहा है। इनकी सफलता पर वैभव,गुंजन, अक्षय,अभिमन्यू एवं प्रणव सहित दर्जनों लोगों ने खुशी जाहिर की है। 

🔼विष्णुकांत की  हॉबी--

विष्णुकांत ने बताया कि इनका शौक फिल्म देखने तथा हिन्दी गाना सुनने का है।

🔼छात्रों के लिए दो शब्द--

छात्र जिस भी संकाय में रूची ले रहे हैं, उनको आत्मविश्वास के साथ,ईमानदारी और दृढ़संकल्पित होकर तैयारी करने की ललक हो सफलता चरण चुमेगी।

🔼सफलता का मुख्य श्रेय--

विष्णुकांत ने अपनी सफलता का पहला श्रेय अपने बहनोई शैलेश कुमार सिंह को दिया है। जो टीवीएस मोटर्स में कार्य कर रहे हैं। इसके अलावे माता-पिता,बहन,गुरुजनों व दोस्तों में वैभव,गुंजन,अक्षय,अभिमन्यू एवं प्रणव को भी सफलता अर्जित करने में सहायक माना है। 

उन्होंने बताया कि सफलता हासिल करने के लिए कठिन परिश्रम, निरंतर अध्ययन,अध्ययन के प्रति ईमानदारी और स्वस्थ दिनचर्या होना आवश्यक है। कई तरह की समस्याओं के बावजूद मैंने हिम्मत नहीं हारी। लगातार मेहनत से सफलता हासिल करने में भगवान शंकर और हनुमान जी का कृपा पात्र हूँ।

रिपोर्ट : डेस्क दैनिक आजतक।

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