मधेपुरा। प्रखंड क्षेत्र में नहीं निकला ताजिया जुलूस,सादगीपूर्ण तरीके से मनाया गया मोहर्रम
आलमनगर ग्रामीण (मधेपुरा)।
कोरोना के संभावित तीसरी लहर को देखते हुए सरकारी निर्देशानुसार पिछले वर्ष की भांति इस बार भी विभिन्न मुस्लिम टोले में सादगीपूर्ण तरीके से मुहर्रम पर्व मनाया गया। मुस्लिम धर्मगुरुओं के निर्देश एवं सरकार के गाइडलाइन के अनुसार प्रखंड क्षेत्र में किसी भी करबला मैदान में न तो ताजिया रखा गया और न ही जंगियों का अखाड़ा ही सजाया गया। मुस्लिम अकीदतमंदों ने परम्परा का मामूली निर्वहन कर अपने-अपने संबंधित इमामबाड़े में ताजिया स्थापित कर फातिहा पढ़ इबादत करते देखे गए।
मालूम हो कि मुहर्रम के पहली चांद से ही मुस्लिम अकीदतमंदों द्वारा जगह-जगह ताजिया बिठाने की तैयारियों के साथ-साथ शहादत नामा पढ़ने, मोहर्रमी ढोल ताशे की आवाज एवं मरशिया पढ़कर सिरनी तक्सीम की रस्म की अदायगी की जाती थी। जिसकी इस बार महज रस्म भर की अदायगी की गई। पुरैनी प्रखंड क्षेत्र के नयाटोला,नरदह,योगीराज, भटौनी, बंशगोपाल,कहरटोली, फुलपुर,चंदा,औराय, खेरहो, सपरदह,भोला बाबू बासा, गणेशपुर दियरा,बघवा दियरा,डुमरैल,पुरैनी आदि के करबला मैदान पर सन्नाटा छाया रहा। मुस्लिम अकीदतमंद मो.मुश्ताक,मो.पप्पू,मो.सहादत,जैनुल आबदीन,मो.वाजिद, मो.मोबीन,जुबेर आलम,अफरोज आलम,मो.अबरार उर्फ हीरो,मो.अयूब आलम,मो.निहाल,मो.निसार, मो.शब्बीर, मो.शहाबुद्दीन,पप्पू खान,अताउर रहमान,शेख जसीम, मो.शमशाद,मो.सुद्दी आदि ने बताया कि लॉकडाउन को लेकर इस बार मोहर्रम का पर्व बिना जुलूस, बिना खेल प्रतियोगिता और बिना मेले का थोड़ा फीका जरूर नजर आया। लेकिन लोगों के इबादत में कहीं भी कमी नजर नहीं आई। उन सभी ने कहा कि सुन्नी व सिया वक्फ बोर्ड के अनुरोध एवं स्थानीय प्रशासन के निर्देशानुसार कही भी मुहर्रम पर जुलूस नहीं निकाली गयी। लोगों ने घरों में फातिया पढ़कर त्योहार के रस्म की अदायगी की।
रिपोर्ट : अनिल महाराज ।
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