मधेपुरा। सही पोषण देश रौशन: आंगनबाड़ी केद्रों पर लगायी गई पौष्टिक खाद्यपदार्थों की प्रदर्शनी

🔼जिले में 21 मार्च से 4 अप्रैल तक मनाया गया पोषण पखवाड़ा ।

🔼आंगनबाड़ी केंद्रों पर महिलाओं एवम् बच्चों के अभिभावकों को दी गई जानकारी।

🔼आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने बताया पोषण का महत्व। 

मधेपुरा।

जिले में 21 मार्च से 4 अप्रैल तक पोषण पखवाड़ा का आयोजन किया गया। इस पखवाड़ा के दौरान सही पोषण के प्रति लोगों में जागरूकता लाने को लेकर लगातार  विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन हुआ। इसी कड़ी में पोषण पखवाड़ा समापन के दिन अर्थात 4 अप्रैल को जिले के आंगनबाड़ी केंद्रों पर सही पोषण देश रौशन के तहत आंगनबाड़ी पौष्टिक खाद्यपदार्थों की प्रदर्शनी लगाकर लोगों को जागरूक किया गया। आई सी डी एस के जिला प्रोग्राम पदाधिकारी मो कबीर ने बताया पोषण पखवाड़ा के दौरान लोगों को स्वास्थ्य एवम् स्वस्थ जीवनशैली के बारे में जागरूक किया गया।

इसके तहत स्वस्थ बच्चे की पहचान, समुदाय स्थल पर पोषण के प्रति लोगों में जागरूकता, एनीमिया की रोकथाम पारंपरिक भोजन के जरिए उचित पोषाहार की प्राप्ति सहित अन्य विषयों पर आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से लोगों को प्रेरित किया गया।  

🔼गर्भावस्था के दिनों में बेहतर पोषण की जरूरत -

आई सी डी एस के प्रोग्राम पदाधिकारी  ने बताया कि गर्भावस्था के दिनों में विशेष रूप से बेहतर पोषण की जरूरत होती है। माता एवं गर्भस्थ शिशु के बेहतर स्वास्थ्य एवं प्रसव के दौरान होने वाली संभावित जटिलताओं में कमी लाने लाने के लिए गर्भवती के साथ परिवार के लोगों को भी अच्छे पोषण पर ध्यान देना चाहिए। इसी उद्देश्य से पोषण पखवाड़ा के तहत आंगनबाड़ी केद्रों पर विभिन्न गतिविधियों का आयोजन कर लोगों को जागरूक किया गया । 

🔼बच्चों का शारीरिक एवं मानसिक विकास पूरी तरह से उनके पोषण पर निर्भर - 

राष्ट्रीय पोषण मिशन की जिला समन्वयक अंशु कुमारी ने बताया बच्चों का शारीरिक एवं मानसिक विकास पूरी तरह से उनके पोषण पर निर्भर करता है। वर्तमान वैश्विक महामारी के दौरान प्रतिरोधक क्षमता पर काफी जोर दिया जा रहा है। जिनके शरीर की प्रतिरोधक क्षमता जितनी मजबूत होगी उनका संक्रमित होने की  सम्भावना उतना ही कम होगा। किसी के प्रतिरोधक क्षमता का सीधा संबंध उनके खान-पान यानि पोषण से है। यही बात बच्चों के साथ भी लागू होती है। इसलिए जरूरी है कि बच्चों की प्रतिरोधक क्षमता को मजबूती प्रदान करने के लिए उनका खान-पान का विशेष ध्यान देना जरूरी है यानि उनका उचित पोषण किया जाय।

बाल्यावस्था से उचित पोषण करते रहने से उनके शरीर की प्रतिरोधक क्षमता मजबूत रहेगी और आगे चलकर वे कई तरह की बीमारियों की चपेट में आने से बचे रह सकेंगे। उचित पोषण के अभाव में  शारीरिक और मानसिक रूप से कमजोर रहने के साथ-साथ बच्चो की शरीर की प्रतिरोधक क्षमता भी कमजोर रहती है। जिसके कारण वे  बार-बार बीमार होने लगते हैं। यह उनके कुपोषित होने के आरंभिक लक्षण हैं। इसलिए जरूरी है कि बच्चों के खान-पान का विशेष ध्यान रखते हुए उन्हें कुपोषण मुक्त रखा जाय।

रिपोर्ट : डेस्क दैनिक आजतक।

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